सुलझा हुआ मनुष्य वह है जो अपने निर्णय स्वयं करता है, और उन निर्णयो के परिणाम के लिए किसी दूसरे को दोष नही देता !!!

हमें हार नहीं माननी चाहिए और समस्या को हमें हराने की अनुमति नहीं देनी चाहिए" डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम

ये आईने कभी आँखों को पढ़ नहीं पाते ये लबों की हँसी से आगे बढ़ नहीं पाते है जिनके दम से ज़माने में रंग और ख़ुश्बू वो फूल अपने ही काँटों से लड़ नहीं पाते मालविका हरिओम

तू कितनी कठिन है ज़िंदगी,, कि तुझे पढ़ने के लिए,, मुझे अपने स्कूल की पढ़ाई छोड़नी पड़ी,, कीर्ति चन्द्रा

ख्वाहिशों ने जब भी कोशिश की उड़ने की, परिस्थितियों ने "पैरों" में बेड़ियां डाल दिया..!! विरक्ति

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