ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं, मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं. आलोक श्रीवास्तव

तुलसी भरोसे राम के, निर्भय हो के सोए। अनहोनी होनी नही, होनी हो सो होए। तुलसीदास

कहते-सुनते बात तुम्हारी सो जाता हूँ ऐसे ही मैं रोज़ तुम्हारा हो जाता हूँ अश्विनी यादव

किसी का मजाक और अपना पैसा सोच समझकर ही उड़ाना चाहिए।

रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी, देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है। वसीम बरेलवी

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