कारवाँ गुज़र गया, मेघा छाये आधी रात को खिलते हैं गुल यहाँ फूलों के रंग से.. गोपाल दास ‘नीरज’

पता नही हम कब जान पाएंगे, लिपस्टिक कड़वी होती है या मीठी !

शीघ्रता में विवाह करने पर हम फुरसत से पश्चाताप करते हैं। विलियम कांग्रीव

हर क़दम इस एहसास से आगे बढ़ी हूँ कि मेरे पीछे मैं खुद ही खड़ी हूँ !!

आखिर में ज़िंदगी चंद सवाल, और कुछ जवाब बनकर रह जाती हैं...

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