मुझे 'जिम जाने की क्या जरूरत है,
जीवन के बोझ तो उठा ही रहा हूं..!
मरीज़ हमको दवाएँ बताने लगते हैं
बुरा हो वक़्त तो सब आज़माने लगते हैं
नए अमीरों के घर भूलकर भी मत जाना
हर एक चीज़ की कीमत बताने लगते हैं
मलिकज़ादा जावेद
और फिर छोड़ गया वो जो कहा करता था ,
कौन बदबख्त तुम्हें छोड़ के जा सकता है ।।
अपनी ज़िंदगी की तारीफ तब भी करो..
जब वो तुम्हे कुछ ना भी दे रही हो...!!
मैं क्या बताऊँ कैसी परेशानियों में हूँ
काग़ज़ की एक नाव हूँ और पानियों में हूँ
भारत भूषण पन्त