नहीं मांगती प्राण प्राण में , सजी कुसुम की क्यारी स्वप्न स्वप्न मे गूंज सत्य की , पुरुष पुरुष मे नारी रामधारी सिंह दिनकर

जरूरत पड़ने पर जो साथ दें, वो अपने से बेहतर होता हैं...

पद और पैसे से कितने भी अपराध छुपा लो साहब, किसी गरीब की बद्दुआ तुम्हे सुकून से जीने नहीं देगी...

ठहरेंगे कहीं तो खबर कर देंगे , मौत से कह दो कि अभी सफ़र में हैं हम ..!!

जिंदगी में आप जितनी बार प्रयास करेंगे.. उतनी ही बार आप कुछ नया प्राप्त करेगे..!!

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