हमारा खुद का एक रुतबा है, आप कोई भी हो फर्क नहीं पड़ता

वो लौट कर आई है मनाने को... शायद आजमा कर आई है जमाने को..!!

षडयंत्र से सफलता मिल सकती है , श्रेष्ठता नहीं..!!

हमें भी इश्क़ के मारों पे रहम आता है , ये बोझ वो है जिसे हमनें भी उठाया है ।।

अजीब है.. औरत खुल कर हंस नहीं सकती बद किरदार कहते हैं, मर्द खुल कर रो नहीं सकता कायर कहते हैं..

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