रफ्फू ना कर इसे ए दर्जी खुदा के लिए की दिल के सुराख से हवा खुश ग्वार आती है

नर हो न निराश करो मन को कुछ काम करो कुछ काम करो। मैथिलीशरण गुप्त

शक्ल पर मरने मिटने वाले बहुत देखे , हृदय की तिजोरी तलाशने वाला न मिला ।

समझ के बाहर भी एक दुनियाँ होती है, जो दुनियाँ की समझ के बाहर होती है l

हमारे जीने का तरीका थोड़ा अलग है, हम उमीद पर नहीं अपनी जिद पर जीते हैं

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