दुर्घटना तो जन्म है मृत्यु तो घटना का अंत है

न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है। मैथिलीशरण गुप्त

कुछ लड़कियां 30 सेकंड की reels के लिए, अपनी इज्जत को दांव पर लगाने को तैयार हो जाती हैं।

लहू में घरौंदा कर के अहसास बैठे थे नस नस से उभर कर वो आज तूलिका के द्वार से फलक पर उतर रहे हैं लोग ये समझ रहे हैं मैं तेरी #तस्वीर बना रहा हूं हकीकत में तो मैं तूलिका की आंखों से तुझे देख रहा हूं.... मैं कहां #तस्वीर...

पुराने यार भी आपस में अब नहीं मिलते... न जाने कौन कहाँ दिल लगा के बैठ गया...

Translate »