त्याग वहीं करें जहां उसकी जरूरत हो, दोपहर में दिया जलाने से अंधकार नहीं खुद का वजूद कम होता है !

मोहब्बत की उम्र में जिंदगी, संघर्षो मे उलझी है। किताबों के बीच गुलाब नही, आज भी 'कलम' रखी है।।

घर छोड़ा नादानी में बीवी छोड़ी जवानी में, देश बेचा बुढ़ापे में भक्त खुश हैं गुलामी में !

फल हमेशा बीज से बड़ा होता है, ठीक वैसे ही परिणाम भी कर्मों से बड़ा होता है !!!

संघर्षो के दिनों में, तन्हा हर इंसान होता है। साथ न कोई यार होता है, और न इतवार होता है।।

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