लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है ... राहत इंदौरी

गरीबी पर शायरी लिखने बैठा था , कमबख्त कलम ही रो पडी।।

वर्तमान में स्त्री का एक हिस्सा , उसके बहोत से हिस्सो पर भारी पड़ रहा है ।

ना दोस्त है कोई मेरा ना ही अब कोई रहबर है, मेरी ज़िन्दगी में मोहब्बत का होना ही ज़हर है..!! विरक्ति

चार दिन बाज के ना उड़ने से आसमान कबूतरों का नहीं होता.!!

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