ये रविवार नही आसान कपड़ो का दरिया है धो धो कर सुखाना है.

चलते चलते राह में तुमसे अलग हो जाए हम कौन जाने कब तुम्हारी दुखती रग हो जाए हम वसीम बरेलवी

लोग बेताब थे मिलने को मंदिर के पूजारी से, हम दुआ लेकर आ गये बाहर बैठे भिखारी से..!

नफरत आसान है, कोई भी कायर नफरत फैला सकता है दयालु होने के लिए साहस की आवश्यकता होती है

आज की पीढ़ी को.. ईमानदार बाप निकम्मा लगता है..!!

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