दुश्मनों से प्यार होता जाएगा दोस्तों को आज़माते जाइए। ख़ुमार बाराबंकवी

पानी और आंसू में बस इतना सा फर्क है पानी बिना वजह बहता है आंसू किसी वजह से

अंत का भी अंत होता है कुछ भी कहां अनंत होता है पतझड भी एक घटना है बारह महीने कहां बसंत होता है

मुझे समझ पाना इतना आसान नहीं... गहरा समंदर हूं , खुला आसमान नहीं...!!

सोच रहा हूँ बंद करदु ये शाएरी का सफर बस तेरी लाल लिपिस्टिक पर पूरी ग़ज़ल लिखदूँ...

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