नौकरी नौजवानों के जीवन का वह श्रृंगार है, जिसके बिना समाज का कोई भी अंग उन्हें सम्मान की दृष्टि से नहीं देखता है।

हर दौर में जुल्म रहा हैं, और हर दौर में ज़ालिम मिटा हैं।

वक़्त बदल गया है अब बेटियाँ नहीं, बेरोजगार लड़के माँ-बाप के कंधों पर बोझ होते हैं। जैकी यादव

वो जो उतरा है नज़र से इस बार, हमने उसकी नज़रें भी उतारी थी कभी !

मिट्टी के हम चराग़ हैं यूं मत बुझा हमें , नादान -- तेरे ताक की रौनक हमीं से है

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