जाती है सबकी नज़र तुम्हारी ही तरफ, सब्जी़ मंडी में टमाटर जैसी हो तुम ।।

दफन कर दिया था जो किरदार सुकून कि तलाश में, आज परछाईं से उसकी सामना हुआ तो रूह कांप गई..!!

बात सह गए तो रिश्ते रह गए बात कह गए तो रिश्ते ढह गए

परिंदों को नहीं पता उनका मजहब क्या है, वरना आसमां भी खून से नहा गया होता..!!

पुष्प की सुगंध वायु के विपरीत कभी नहीं जाती, लेकिन मानव के सदगुण की महक सब ओर फैल जाती है। गौतम बुद्ध

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