हवाएँ ज़ोर कितना ही लगाएँ आँधियाँ बन कर मगर जो घिर के आता है वो बादल छा ही जाता है

अपनी कहानी का लेखक मैं खुद हूं , जब मन करेगा किरदार बदल दूंगा ।।

मैं नहीं जानता मेरी लाश को गिद्ध नोचेंगे या दाह संस्कार होगा, मगर ये जानता हूं मुझे पढ़ने के बाद मोहब्बत का तिरस्कार होगा

दुर्घटना तो जन्म है मृत्यु तो घटना का अंत

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ऐसा नहीं के हम बुरे हैं बोहत इक प्यारी सी नज़र, की है बस कमी

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