मेरे कानों का वो झुमका हमारे इश्क़ की छन छन पेइतराता हैतेरे हाथों की छुअन सेजाने क्यूँ अब भी शर्माता है

जीवन कि सभी यातनाओं से अब मुक्ति कि सौगात चाहिए, सो जाऊं सुकून कि नींद तेरी गोद में ऐसी हसीन मौत चाहिए..!! विरक्ति

जब तक सब अपने थे ज़िन्दगी साथ गुज़ारी है, धीरे धीरे सब बदल गयें,अब हमारी बारी है।

एक नफरत ही है जिसे दुनिया चंद लम्हो मे जान लेती है वरना चाहत का यकीन दिलाने मे तो जिंदगी बित जाती है

पवर पहचान बना सकती है सम्मान चाहिए तो कर्म करो।

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