किसी को अपना बनाना हुनर ही सही लेकिन किसी का बन के रहना कमाल है.

अब तो इस राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई परवीन शाकिर

बहुत तकलीफ देते है वो जख्म, जो बिना कसूर के मिलते है।

बाप उस वक्त टूट जाता है!.. जब बच्चे जिद करे कुछ खाने की, और जेब में पैसे ना हो!...

वहाँ कोई महानता नहीं है जहाँ सादगी, अच्छाई और सच्चाई नहीं है। लियो टॉल्स्टोय

Translate »