हर धर्म में है इंसानियत का पाठ, ये अलग बात है कि कुछ लोग इसे पढ़ नहीं रहे हैं।

कुछ कश्तियाँ डूबी है, अपने सूराखों की वजह से भी, यूँ हर बार इल्ज़ाम,, तूफानों पर न लगाया करो !

नियम के बिना और अभिमान के साथ किया गया तप व्यर्थ ही होता है। वेदव्यास

रोटी कमाना बड़ी बात नहीं, परिवार के साथ रोटी खाना बड़ी बात है...

"जिन्हें ईश्वर ने हृदय और परख दी है, वे आदमियों की पोशाक नहीं देखते, उनके गुण और चरित्र देखते हैं।" मुंशी प्रेमचंद

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