जिंदगी में सिर्फ पहली बार, इतना ही कहा है मैंने बहुत मजबूत रिश्ते थे, बहुत कमजोर लोगों से...!

कुछ ग़म और कई उलझनें है जो दौर है जिम्मेदारियों का तो ख्वाहिशों से भी रंजिशें है.

साँच बराबरि तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हिरदै साँच है ताकै हृदय आप॥ कबीर दास

दिल टूट गया है, जिंदगी थम सी गई है। काश, तुम कभी मेरे होते, तो मैं इतना न रोता। तुमने मुझे धोखा दिया, और अब मैं अकेला हूँ। मैं नहीं जानता कि क्या करूँ, मैं तुमसे बहुत प्यार करता था। तुम मेरे सपनों को तोड़ दिया, और अब मैं...

पिता सी ही महफ़ूज़ जिन हाथों में होती है कलाई नारी के लिए वो शख्स महज़ होता है उनका भाई।

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