जो झूठ पर भी वाह करेगा, वो ही तुम्हें तबाह करेगा.

जो चीज वक्त पर ना मिले , बाद मिले या ना मिले क्या फ़र्क पड़ता है...

साधू भूखा भाव का, धन का भूखा नाहिं, धन का भूखा जी फिरै, सो तो साधू नाहिं। कबीरदास

तुम्हारा एकांत ही तुम्हें मनुष्य बना सकता है, भीड़ तुम्हें भेड़ बना देगी। जया मिश्रा

धागे बहुत कमज़ोर चुन लेते हैं हम, और फिर सारी उम्र गाठ बांधने में गुज़र जाती है...

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