हम दोनों जानते हैं
वह दिन बुरा था सबसे बुरा
जिस दिन हम आखिरी बार मिले थे
लेकिन
आज मैं दावे से कह सकता हूं
वह दिन
इतना भी बुरा नहीं था
कम से कम
उस दिन हम दोनों आखरी बार...
कोई भी मां तब ज्यादा बेचैन होती है
जब बात उसके बच्चों पर होती है ।।
हमसे दिखावा नहीं होता,
हम आईना है हमसे ये फरेब नहीं होता।
कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
दुष्यंत कुमार
कभी किसी हंसते हुए चेहरे को पढ़कर देखना,
आँसुओं की उनमें अनगिनत कहानियां मिलेंगी....!!