चिंता से चतुराई घटे, दु:ख से घटे शरीर। पाप से लक्ष्‍मी घटे, कह गये दास कबीर।।

ये उदास रात उजड़ी हुई नींद और चीखते हुए हम, लगते तो ज़िन्दा हैं दोस्त लेकिन ख़त्म हो गये हम..!!

सभ्यता का युग तब आएगा जब औरत की मर्ज़ी के बिना कोई औरत को हाथ नहीं लगायेगा।

तुम्हारा गुरूर तुम्हें फनाह करवाएगा मैं क्या हूं ये तुम्हें वक्त बताएगा

अनुभव सच में एक बेहतरीन स्कूल हैं, बस कम्बख़त फीस बहुत लेता हैं...

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