अब मुझे दूसरे का क्या,
ख़ुद का आंसू पोंछना नहीं आता,
हमने देख लिया हैं रूठ कर,
यहां कोई मनाने नहीं आता!
ना धन चाहिए तुझसे ना दौलत चाहिए,
मेरी मां मुझको बस मन कि शुद्धि चाहिए,
और बिन मांगे बहुत कुछ मिल चुका है तुझसे,
बस नियत संभाल सकूं, इतनी बुद्धि चाहिए..!!
शिक्षा भले किताबों से मिले लेकिन ,
सबक हमेशा लोगों से ही मिलता है ..!!
आज फिर समय, मुकद्दर मेरी खुशियों से जीत गया है,
मेरी ज़िन्दगी का एक और साल तेरे बिना बीत गया है..!!
बेज्जती का जवाब इतनी इज्जत से दे,
कि सामने वाला खुद शर्मिंदा हो जाए....