अंध कक्ष में बैठ रचोगे ऊँचे मीठे गान या तलवार पकड़ जीतोगे बाहर का मैदान। रामधारी सिंह दिनकर

किसी के हाथों की कठपुतली बनने से अच्छा है.. कि छोटा ही सही अपना किरदार खुद बनाओ..!!

व्यवहार बदल जाता है , जब काम निकल जाता है ...

मरना तो है ही, अपने मनुष्यत्व और अधिकार के लिए मरो !

पैसा बचाने पर ध्यान मत दीजिए, बल्कि ज्यादा कमाने पर ध्यान दीजिए...

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