अहमियत यहां हैसियत को मिलती है और हम जज़्बात लिए घूम रहे हैं!

जज्बात में बहुत ताकत है , निर्माण की भी और विध्वंस की भी।

दूसरों के लिए न सही, खुद के लिए तो अच्छे बनो।

कीलें लगवा दो उस दहलीज़ पर जहां की नींव नफ़रत से भरी हो।

मत पूछ तेरे लिये हम कितना तड़पते थे, आंसू छिपाकर अपने अंदर से बिलखते थे..!!

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