अंधेरे को कोसने से बेहतर है कि एक दीया जलाया जाए।

पहले पड़ोसी भी परिवार हुआ करते थे, अब परिवार भी पड़ोसी हो गए हैं...

ज्यादा Available होने से भी, इंसान की Value घट जाया करती हैं...

कोई कितना ही बड़ा क्यों न हो, अंधों की तरह उसके पीछे न चलो। स्वामी विवेकानंद

गलती पीठ की तरह होती है... औरों की दिखती है अपनी नहीं..!!

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