वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह

तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ

मैं अपने आप को निराश नहीं होने दूंगा हार की हर दीवार तोड़ूँगा “मैं”और…!! ज़ोरदार तरीक़े से ही पलटूँगा बार बार हर बार मैं..

अव्वल अल्लाह नूर उपाया कुदरत के सब बंदे एक नूर ते सब जग उपजा कौन भले कौन मंदे

गरीब की थाली में पुलाव आ गया है। लगता है शहर में चुनाव आ गया है।

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