मुश्किल तो बहुत होती होगी तुम्हे, इतनी ठंड़ में अपने दो-दो चहरे धोते हुए..!!

हम को बचपन ही से इक शौक़ था बर्बादी से नाम लिख लिख के मिटाते थे ज़मीं पर अपना!

कुछ दरवाज़े कभी बंद नहीं होते बस हम ही खटखटाना छोड़ देते हैं

मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए। डॉ. भीमराव आंबेडकर

थोड़ा डुबूंगा, मगर मैं फिर तैर आऊंगा , ऐ ज़िंदगी, तू देख, मैं फिर जीत जाऊंगा...

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