|| शायरों से ताल्लुक रखो तबियत ठीक रहेगी ये वो हकीम हैं जो अल्फ़ाजों से ईलाज करते हैं ||

घर कैसा भी हो, मां के बिना अधूरा ही लगता है...

मोहब्बत में जो सुन रखा था वैसा कुछ नहीं होता, इसमें बन्दा मरता है और ज़्यादा कुछ नहीं होता

मांगना नहीं कमाना सिखों चाहे इज्जत हो या दौलत..!!

हदों में रहोगे तो लिहाज देखोगे पार कर ली तो फिर मिज़ाज देखोगे..

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