दिल में वो भीड़ है कि ज़रा भी नहीं जगह  आप आइए मगर कोई अरमाँ निकाल के ...

लावारिस पडे हैं हम आपके ख्यालो में.. आपने अपनाया भी तो ठूकराने के लिये..!!

बल से तो दुसमन न जीते, छल से दोगले जीते भी तो क्या जीते......

पैसा इंसान का लिबास तो, बदल सकता है पर औकात कभी नहीं...

औकात जो नाप रहे हो ज़ुबान की धार से , ज़रा ख़ुद में झाँक लो ज़मीर के दीदार से...

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