जिंदगी की जंग में हालात चाहे जैसे भी हों।। धडकनों में नशा जीत का ही होना चाहिए।।

धीरे धीरे सब छोड़ जाते हैं, दिसंबर तो बस एक महीना है....

संभालना था सम्पूर्ण सृष्टि को एक धागे में, ईश्वर ने गढ़ी स्त्री और यात्रा पर निकल गया!

ज़िम्मेदारी क्या उठा ली मैंने , लोग मुझे मेरी उम्र से बड़ा समझ बैठे ...

जरा अदब से जनाब हम शांत हैं ' संत नहीं।

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