एक”मरहम”की …तलाश में कई “ज़ख्मों”से ….गुज़रे हम

तुम मुझे इतना भूल जाना की तुम जी सको ,मैं तुम्हें इतना याद रखूगा की मैं जी सकूं...

मुझे बर्दाश्त करने की नसीहत ना दीजिएबल्कि मेरी जगह आइए और बर्दाश्त कीजिए...

पहले कच्चे घरों में स्वर्ग की अनुभूति हुआ करती थी अब शीश महल में अपनेपन का स्पर्श नहीं मिल पाता

रोना वीकनेस का साइन नहीं है,इंसान होने का साइन है !!

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