समस्या का अंतिम हल माफ़ी है, कर दो या मांग लो...

सोचो तो सिलवटों से भरी है तमाम रूह देखो तो इक शिकन भी नहीं है लिबास में

हर वक्त का हंसना तुझे बर्बाद न कर दे, तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर

सोचो तो सिलवटों से भरी है तमाम रूह देखो तो इक शिकन भी नहीं है लिबास में

जब शौक के लिए वक्त ना मिले, तो समझ लेना जिन्दगी शुरु हो गई है ..

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