राय पहले से बना ली तू ने दिल में अब हम तेरे घर क्या करते

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी

मुझे तेरी मोहब्बत ने अजब इक रौशनी बख़्शी मैं इस दुनिया को अब पहले से बेहतर देख सकती हूँ!

कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगी, मैं अपने हाथ से उस की दुल्हन सजाऊँगी.....

इश्क़ ने सीख ही ली वक़्त की तक़सीम के अब वो मुझे याद तो आता है मगर काम के बाद

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