तुम्हें गुरुर है तुम्हारा वक्त बोल रहा है! हमें यकीन है हमारा सब्र बोलेगा!!

दुख, फरेब, गरीबी और बदनसीबी को मापना सिखाता हूं, अपनी कलम कि धार से, मैं समाज को आईना दिखाता हूं..

जो हर मुलाकात पे चाय पिलाते हैं , वो लोग सीधा मेरे दिल को भाते हैं ।।

स्त्री और मिस्त्री से, टकराने का मतलब घर का नक्शा बिगाड़ना।

मनचाहा पाने के लिए, चाहना भी मन से पड़ता है...

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