सांसें उधार ले के गुज़ारी हैं जिंदगी हैरान वो भी थी कि मैं मर क्यूं नहीं गया

कहा जो मैंने कि मर जाऊँगा तो कहती हैं तुम्हारे चाहने से जिंदगी थोड़ी निकलती है

ज़रूरतें तो फिर भी मान जातीं हैं भूख के पास मगर होता नहीं दिमाग़

मान ही लो अब जो भी कुछ है सच्चा झूठा सा, कब तलक करते रहें दिल की वक़ालत हम ?

जेब भरी हो तो रिश्ते बनाने वाले मिलेंगे , जेब खाली हो तो सबक सिखाने वाले मिलेंगे ...

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