ज़रूरतें तो फिर भी मान जातीं हैं भूख के पास मगर होता नहीं दिमाग़

मान ही लो अब जो भी कुछ है सच्चा झूठा सा, कब तलक करते रहें दिल की वक़ालत हम ?

जेब भरी हो तो रिश्ते बनाने वाले मिलेंगे , जेब खाली हो तो सबक सिखाने वाले मिलेंगे ...

छिप गई है हंसी चेहरे की, माथे पर चिंता के निशान है, ज़िम्मेदारियां जेब से बड़ी और साथ सिर्फ़ स्वाभिमान है.

बहुत सीधा सा परिचय है जिंदगी का, आसूं सच्चाई हैं और मुस्कुराहट एक नाटक...

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