कर्ज़ उतर जाता है एहसान नहीं उतरता।

राम तुम्हारे युग का रावन अच्छा था... दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था... प्रताप सोमवंशी

सुकून जिसे कहते हैं, यारों वो सिर्फ़ ❣️मां❣️ होती है।

दूसरों के कर्मों का श्रेय स्वयं लेकर आप जयेष्ठ बन सकते हैं, श्रेष्ठ कदापि नहीं !

मेरे लिए मंज़िल तुम, और यात्रा, तुम्हारा इंतिज़ार

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