सुकून जिसे कहते हैं, यारों वो सिर्फ़ ❣️मां❣️ होती है।

दूसरों के कर्मों का श्रेय स्वयं लेकर आप जयेष्ठ बन सकते हैं, श्रेष्ठ कदापि नहीं !

मेरे लिए मंज़िल तुम, और यात्रा, तुम्हारा इंतिज़ार

जिन्हें इंतजार आता है, उन तक बसंत खुद चल कर आता है।

ज़िद है तो ज़िद ही सही, आत्म सम्मान से बड़ा कुछ भी नहीं..

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