7

Jul

क्यों है 
तेरा इन्तेजार ?

किस बात कि
है दरकरार ,, ?

जानता हूँ 
कितनी ही सदायें दूँ
तू ना आएगा पलटकर

फिर भी क्यों है
जिया बेकरार 
व्यर्थ है आशु
अब पिया मिलन 
की आस,,,,,
आशु

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