28

Jun

यादो मे बसर हो रही थी ज़िन्दगी
जब से आने का पैग़ाम आया
पलपल बेकली इंतजारो का हुआ अंत हर आती हवा की सरसराहट पर भिनी खुशबू आने लगी उनकी मुन्तजिर निगाहे ढूंढ रही मोहब्बत-एकशिश की परवाह
बरकत है उनकी
कुछ श्रृंगार कर लें…तो ..उनकी
चाहत की निगाहों से संवर जाए

Share this post


RELATED

Posts

Translate »