26

Jun

बीते मीठे लम्हों का है जो आसरा
हसरतें खामोश ठहरा ज़ज्बातो का दायरा
तेरी भीनी आंखों में खो जाए मन मेरा
तुझसे ही जाने क्यूँ  मेरा है ऐसा राब़्ता
चादर की सिलवटें में है जो थोड़े फ़ासले
तेरे पास ना होने का करे हर पल इशारा

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