24

Jun

शुरू-शुरू में सब यही चाहते हैं
कि सब कुछ शुरू से शुरू हो
लेकिन अंत तक पहुँचते-पहुँचते हिम्मत हार जाते हैं
हमें कोई दिलचस्पी नहीं रहती
कि वह सब कैसे समाप्त होता है
जो इतनी धूमधाम से शुरू हुआ था
हमारे चाहने पर।

~ कुँवर नारायण

Share this post


RELATED

Posts

Translate »