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Jun
लहू रिसने नही देता कभी जो अपने अंदर से ,
ज़माना सोचता है वो ज़ख़्म ताज़ा नहीं होता!
बस आंखों की उदासी खोलती है राज ए दिल वरना ,
मेरे चेहरे से मेरे गम का अंदाज़ा नहीं होता!
Jun
लहू रिसने नही देता कभी जो अपने अंदर से ,
ज़माना सोचता है वो ज़ख़्म ताज़ा नहीं होता!
बस आंखों की उदासी खोलती है राज ए दिल वरना ,
मेरे चेहरे से मेरे गम का अंदाज़ा नहीं होता!