27

Apr

सुनसान रास्तों पर भी , 
ज़िंदगी ख़ुशगवार लगती है ,,
जब मौजूद हो कुछ भटके हुए साये ,
लाजवाब बेशुमार लगती है ,,
भीड़ थी आसपास बहुत कि
उलझनें और उलझ गई ,,
इसलिए ...छोड़ दिया सब कुछ ,,
अब ना कोई जीत , ना कोई हार लगती है ...

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