10
Apr
मैंने
गुलाब की
मौन शोभा को देखा !
उससे विनती की
तुम अपनी
अनिमेष सुषमा को
शुभ्र गहराइयों का रहस्य
मेरे मन की आंखों में
खोलो !
मैं अवाक् रह गया !
वह सजीव प्रेम था !
मैंने सूंघा,
वह उन्मुक्त प्रेम था !
मेरा हृदय
असीम माधुर्य से भर गया !
Apr
मैंने
गुलाब की
मौन शोभा को देखा !
उससे विनती की
तुम अपनी
अनिमेष सुषमा को
शुभ्र गहराइयों का रहस्य
मेरे मन की आंखों में
खोलो !
मैं अवाक् रह गया !
वह सजीव प्रेम था !
मैंने सूंघा,
वह उन्मुक्त प्रेम था !
मेरा हृदय
असीम माधुर्य से भर गया !