9
Apr
वो ख़्वाब रात का
चाय साँझ की
बारिश की बूंदें रूमानी
वही समां पुराना
धड़कनों से बतियाना
बदला नहीं है कुछ भी
वही मिज़ाज़ आशिकाना
चलो निभाते हैं हम तुम
वही पुराना याराना
लेकर चुस्कियाँ चाय की
करेंगे गुफ्तगू शायराना
Apr
वो ख़्वाब रात का
चाय साँझ की
बारिश की बूंदें रूमानी
वही समां पुराना
धड़कनों से बतियाना
बदला नहीं है कुछ भी
वही मिज़ाज़ आशिकाना
चलो निभाते हैं हम तुम
वही पुराना याराना
लेकर चुस्कियाँ चाय की
करेंगे गुफ्तगू शायराना