14
Aug
एक उदास शहर में कुछ किताबें थी एक छत चार दीवारें थीं कुछ दोस्त थे चाय के कुल्हड़ थे गलियाँ थी किनारे थे एक उदास शहर में जहाँ वो थी और ज़िंदगी थी..
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एक उदास शहर में कुछ किताबें थी एक छत चार दीवारें थीं कुछ दोस्त थे चाय के कुल्हड़ थे गलियाँ थी किनारे थे एक उदास शहर में जहाँ वो थी और ज़िंदगी थी..