2

Aug

चलो कल्पनवाओं का सैर करे
दुनियां के भीड़ से पार चले
उन्मुक्त भाव उड़ने के चाह भरे
मन के उम्मीदें पे पंख जड़े
होले होले दुनियां से पार चले 
जन्नत के चौखट पे पग रखे
अलग ही जहां का दीदार करे
होगी अनुभूति जो ख्याल करे
चांद सितारों  दरम्यान रवि रहे
बिखरे रोशनी से आफताब हुए ..!!

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