5

Jul

हर लम्हा लंबा और भारी है,
तुम्हें भुलाने की जंग जारी है...

वो जो साँसों में बसे रहते हैं,
उन्हीं से मिलती चोट भारी है...

गुनाह और ज़ख़्म छिपते नहीं,
 कोशिशें  शिद्दत से  जारी है...

हर एक तंज़ का जवाब है,
कुछ तो हमनें भी की तैयारी है...

नीलम

Share this post


RELATED

Posts

Translate »