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Jul

मैं उठता हूं कभी कलम रखता हूं
इस तरह इश्क के जज्बातों पर सर रखता होगा
खेल कोई इश्क तुम्हारे लिए यारों
मैं तो मरे जिस्मों में मोहब्बत की रूह रखता हूं

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