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Jun
नत हूं मैं सबके समक्ष, बार-बार मैं विनीत स्वर
ऋण - स्वीकारी हूं - विनत हूं
मैं मरूंगा सुखी
मैंने जीवन की धज्जियां उड़ाई हैं।
~ अज्ञेय
Jun
नत हूं मैं सबके समक्ष, बार-बार मैं विनीत स्वर
ऋण - स्वीकारी हूं - विनत हूं
मैं मरूंगा सुखी
मैंने जीवन की धज्जियां उड़ाई हैं।
~ अज्ञेय